पीलीभीत जिला: भारतीय जिले में एक सदैव यादगार स्थान है :


                                इतिहास! 
भारत, अपनी भौगोलिक सुंदरता, सांस्कृतिक विविधता और ऐतिहासिक महत्व के कारण विश्व भर में प्रसिद्ध है। इसके विभिन्न क्षेत्रों में अनेक अद्वितीय और रोचक जिले हैं, जिनमें से एक है पीलीभीत जिला। पीलीभीत उत्तर प्रदेश राज्य का एक प्रमुख जिला है, जिसका इतिहास विशेष रूप से मध्यकालीन और आधुनिक काल में महत्वपूर्ण रहा है। यह जिला अपने साहसिक इतिहास, प्राकृतिक सौंदर्य और स्थानीय संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है। इस लेख में हम पीलीभीत जिले के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त करेंगे।

1824 में क्षेत्र के पुननिर्माण के परिणाम स्वरूप ,जब बीसलपुर तहसील के अंतर्गत परगना बीसलपुर और मरौरी आते थे ।
जो बाद में एक क्षेत्र बन गया। जहानाबाद को रिछा के साथ मिलाकर तहसील पीलीभीत को मुख्यालय बनाया गया ।

पीलीभीत में सबसे ज्यादा निवास करने वाली Caste वंश कुर्मि  (#मराठा #पटेल #वर्मा #पासवान )है : यह तीनों नाम कुर्मी जाति के वंश हैं और पीलीभीत में कुल 5 तहसीलें हैं पाँच ओ तहसीलों में कुर्मी जाति के ही विधायक है ।

पीलीभीत के राजा, राजा वेणु थे । बताया जाता है, रेलवे स्टेशन से 1 किलोमीटर दूर शहागढ़ में टीला स्थित है इस टीले में राजा वेणु का एक महल था।

                        राजा वेणु का टीला !

पीलीभीत जिला उत्तर प्रदेश राज्य के पश्चिमी क्षेत्र में स्थित है और लखनऊ से लगभग 300 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह जिला भौगोलिक रूप से भागीरथी नदी के किनारे स्थित है और उत्तर प्रदेश के उत्तरी पश्चिमी भाग में स्थित है। पीलीभी इस जिले का नाम पहले 'हरदोई द्वीप' रखा जाता था, लेकिन 1850 ईस्वी में इसे 'पीलीभीत' नाम दिया गया। इसका मतलब होता है 'पीली मिट्टी का ब्रह्मांड'। पीलीभीत जिला प्रशासनिक रूप से वाराणसी राज्य के अंतर्गत आता है।


1440 -  गांवों
  721 -  ग्राम पंचायत 
23लाख  - जपसंख्या


जिसमें !
 12लाख  - पुरुष 
 11लाख - महिला है ।

क्षेत्र 3686 प्रति वर्ग किलोमीटर 
घनत्व 551 प्रति वर्ग किलोमीटर

पीलीभीत में 5 तहसील हैं ।
बीसलपुर 
बरखेड़ा 
अमरिया 
कलीनगर 
पूरनपुर 

सार्वजनिक उपयोगिताएँ
18 -अस्पताल
33 - कॉलेज / विश्वविद्यालय
1 - टेलिकॉम
15 - पुलिस थाने
4 - बिजली
17 - बैंक






पीलीभीत का नाम पीलीभीत क्यों पड़ा !
ऐसा माना जाता है इसे  पायरिया समुदाय के बंजारा लोगों के द्वारा बसाया गया था जो कीचड़ और मिट्टी के घर बनाते थे माना जाता है इस शहर का नाम यहा की पीली मिट्टी के कारण रखा गया है ।

 पीलीभीत हरे-भरे जंगलों, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और बांसुरी निर्माण के लिए प्रसिद्ध है भारत में निर्माण किए जाने वाली 95% बांसुरी का निर्माण पीलीभीत जिले मे किया जाता है ।



1.1.ओढ़ाझार मंदिर श्रेणी धार्मिक ...



2.2.पीलीभीत टाइगर रिज़र्व श्रेणी प्राकृतिक / मनोहर सौंदर्य ...


3.3.गौरी शंकर मंदिर यह मंदिर 250 वर्ष पुराना है | यह देवहा और खकरा नदी के तट पर मोहल्ला खखरा में स्थित है।… ...


4.4.राजा वेणु का टीला ...


5.5.छटवी पादशाही गुरुद्वारा ...

6.
6.हज़रत शाह मोहम्द शेर मिया की दरगाह ...
जामा मस्जिद।

Rivers :
इसके एक ओर शारदा नदी है, दूसरी ओर नेपाल की 'शुक्ला फाटा सेंचुरी' तीसरी ओर किशनपुर का वन्य जीव विहार। यहां पर एक ओर बड़े-बड़े पेड़ हैं तो दूसरी ओर ऊंची घास और दलदल।



पीलीभीत जिला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से धनी है। यहां विभिन्न पर्यटन स्थल हैं जो इस जिले के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। पीलीभीत जिला में कई पुरातात्विक स्थल, मंदिर और मस्जिदें स्थित हैं।

यहां का सबसे महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल है पीलीभीत टाइगर रिजर्व, जो जिले के वन्य जीवन की धरती माना जाता है। यहां पर मुख्य रूप से बाघ, हाथी, नीलगाय, चीतल और अन्य जानवर पाए जाते हैं। इसके अलावा, पीलीभीत जिला में चीतरा झील, महोबा किला, महास्मारक और राजमहल जैसे पर्यटन स्थल भी हैं।

पीलीभीत जिला अपनी स्थानीय संस्कृति और लोकसंगीत के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा पशुपालकी पर आधारित है और यहां के लोग अपनी परंपरागत संगीत और नृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को सजीव रखते हैं। पीलीभीत जिला में लोकगीत, भजन, कविता और कारागार संगीत भी प्रचलित हैं।

पीलीभीत जिला अपने विविध और स्वादिष्ट खाद्य संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां की रसोई में उत्तर प्रदेश की पारंपरिक व्यंजनों का आनंद लिया जा सकता है। यहां की प्रमुख खाद्य पदार्थों में मक्के की रोटी, दाल बाटी चूरमा, मटर पनीर, गुलगुले, और बाल मिठाई शामिल हैं।

पीलीभीत जिला अपनी आदिवासी संस्कृति के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां के प्रमुख आदिवासी समुदायों में ठार, थारे, ताउड़ा, वन राजा और गाड़ी समुदाय शामिल हैं। इन समुदायों की संगीत, नृत्य, रंगमंच आदि ।





जय श्री राम 🚩
: आशु पटेल 

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