बीसलपुर बारह पत्थर चौराहे का अनोखा है इतिहास, इस नदी का रुख रोकने को कबीलों ने लगाए थे ये पत्थर !

बीसलपुर बारह पत्थर चौराहे का अनोखा है इतिहास, इस नदी का रुख रोकने को कबीलों ने लगाए थे ये पत्थर !


ब्रिटिश हुकूमत के दौरान यहीं पर शिव मंदिर का निर्माण हुआ, जिसमें 12 गुंबद बनवाए गए। लोगों की मान्यता है कि इसी शिव मंदिर में पूजा पाठ करने पर देवहा नदी ने अपना रुख बदल लिया था। पहले इस स्थान पर घना जंगल था। इस स्थान पर ऊंचा टीला होने के कारण पहले बंजारा जाति का कबीला रह रहा था। बताते हैं कि 1842 के आसपास इस जगह पर लोग बस्ती बनाकर रहने लगे। 1857 में ब्रिटिश सरकार द्वारा नियुक्त प्रथम तहसीलदार भूप सिंह ने बारह पत्थर शिव मंदिर का निर्माण करवाया। पास में ही सरोवर विकसित कराया था।


डॉ. राजेश गंगवार, इतिहासकार ,द्वारा ।

बारह पत्थर चौराहा मुख्य पहचान है। इस स्थान पर देश को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आंदोलन की रणनीति बनाया करते थे। इनमें प्रमुख स्वर्गीय कुमार भगवान सिंह, स्वर्गीय श्रीराम शर्मा आदि शामिल थे। ग 


--डॉ. रजत गंगवार, विभागाध्यक्ष इतिहास विभाग राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बीडॉ. रजत 

इतिहास में बारह पत्थर चौराहा का कोई विशेष जिक्र नहीं है। संभवत 1857 के आसपास इस जगह का नामकरण किया गया है। बीसलपुर के नियुक्त प्रथम तहसीलदार ठाकुर भूप सिंह ने इस चौराहा के कुछ दूरी पर ही बारह पत्थर शिव मंदिर का निर्माण कराया था। 


मनोज पाठक द्वारा

नगर के सबसे प्रमुख बारह पत्थर चौराहा का इतिहास रहा है। यह स्थल बहुत प्राचीन हैं। बताते हैं कि 18वीं सदी में इस स्थल पर कबीले की बस्ती थी। तब देवहा नदी का रुख भी इधर ही था। बरसात में नदी में जब बाढ़ आती तो बस्ती में पानी घुस जाता था तब बस्ती वालों ने कहीं से लाकर पत्थर लगाकर ठोकरें बनाई थीं। उन पत्थरों की संख्या 12 थी। बाद में जब यहां पर चौराहा बना तो उसका नामकरण बारह पत्थर हो गया।


सुरेश चंद्र अग्रवाल, प्रबंधक रामलीला मेला कमेटी के द्वारा ।

बारह पत्थर चौराहा अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। जब इस शहर में बस्ती नहीं जंगल था तब 12 पत्थर मैदान के नाम से लोग यहां आते जाते थे। -

राकेश चंद्र मित्तल, अध्यक्ष बारह पत्थर शिव सरोवर कमेटी ,के द्वारा ।

प्रथम तहसीलदार भूप सिंह ने पीलीभीत मार्ग के उस स्थान को बारह पत्थर चौराहा का नाम दिया था। वहां पर पहले जंगल हुआ करता था। बंजारे जाति के लोग बस्ती बनाकर रहते थे। 


राम खिलौना शर्मा, सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य ,द्वारा ।

क्षेत्र में रहने वाला प्रत्येक व्यक्ति इस चौराहे को भली भांति जानता है। यह चौराहा इस क्षेत्र की शान है। यहां के प्रथम तहसीलदार ने इस चौराहे का नामकरण किया था।

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Edited By; Ashu Gyani (Ashu Patel ) 

Jai shri ram 🚩

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