हरिहर किले का इतिहास और उसकी विशेषताये ।ം 🚩

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हरिहर किले का इतिहास 🚩 


हरिहर किला सेउना (यादव) राजवंश काल के दौरान बनाया गया था। इसे 1636 में त्र्यंबक और अन्य पुणे के किलों के साथ खान ज़मम को सौंप दिया गया था। 1818 में 17 अन्य किलों के साथ किले पर कैप्टन ब्रिग्स  ने कब्जा कर लिया था।
लेकिन इसके बाद यह है किला प्रसिद्ध छत्रपति शिवाजी महाराज की वजह से हुआ था । 

हरिहर फोर्ट / हर्षगढ़ एक किला है जो  नासिक शहर से 40 किमी, इगतपुरी से 48 किमी घोटी से 40 किमी ,  भारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में स्थित हे। यह नासिक जिले का एक महत्वपूर्ण किला है, और गोंडा घाट के माध्यम से व्यापार मार्ग को देखने के लिए बनाया गया था। चट्टानों को काटकर बनाई गई इसकी विशिष्ट सीढि़यों के कारण यहां बहुत से पर्यटक आते हैं।

हरिहर, महाराष्ट्र, भारत में एक प्रमुख शहर है। यह शहर नासिक जिले में स्थित है और महाराष्ट्र की उत्तरी भाग में स्थित है। हरिहर को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के लिए भी जाना जाता है। यह शहर पंचवटी नदी के किनारे बसा हुआ है और इसका नाम 'हरी' और 'हर' दोनों ही धर्मों के लिए प्रमुख माना जाता है। यहां के प्रमुख मंदिर, प्रशासनिक और ऐतिहासिक दरबार और रिवर्साइड आवासीय क्षेत्रों के कारण हरिहर पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र है।

हरिहर का इतिहास बहुत पुराना है और इसे प्राचीन काल से ही धार्मिक महत्वपूर्ण स्थान माना जाता है। यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में हरिहर के विश्वनाथ मंदिर, त्र्यंबकेश्वर मंदिर और गंगाधरेश्वर मंदिर शामिल हैं। ये मंदिर भगवान शिव को समर्पित हैं और इनका निर्माण तीसरे से चौथे शताब्दी के दौरान हुआ था। इन मंदिरों में पूजा-अर्चना की विशेषता होती हैं ।

हरिहर के विश्वनाथ मंदिर ने इस क्षेत्र को धार्मिक पर्यटन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनाया है। यह मंदिर शिवलिंग के रूप में जाना जाता है और इसकी महिमा कई धार्मिक और आध्यात्मिक ग्रंथों में उल्लेखित है। यहां के मंदिर की आर्किटेक्चर भी बहुत आकर्षक है और इसे स्थानीय और बाहरी पर्यटकों द्वारा खूब पसंद किया जाता है।

त्र्यंबकेश्वर मंदिर हरिहर का दूसरा महत्वपूर्ण मंदिर है। यह मंदिर त्रिकोणीय आकृति का है और इसे विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित किया गया है। यहां का एक अनूठा तत्व यह है कि इस मंदिर में शिवलिंग के अलावा अगरबत्ती भी जलाई जाती है, जिसे प्राकृतिक गैस के रूप में मान्यता है। इसके अलावा यहां के अंदर एक कुंड है जिसे कुसावर्त त्रिवेणी नदी कहा जाता है और यहां के पर्यटक इसे पवित्र मानते हैं और स्नान करने आते हैं।


पहुँचे कैसे !
इस किले के दो आधार गांव हैं, हर्षवाड़ी और निर्गुड़पाड़ा। हर्षवाड़ी त्र्यंबकेश्वर से 13 किमी है . किले का दुसरा आधार गांव निर्गुड़पाड़ा/कोटमवाड़ी है जो घोटी से 40 किमी है जो स्वयं नासिक से 48 किमी है  और  मुंबई से 121 किमी. घोटी से त्र्यंबकेश्वर तक बस या निजी वाहन से यात्रा की जा सकती है। किले से लौटने के समय का ध्यान रखना चाहिए, त्र्यंबकेश्वर से घोटी के लिए अंतिम बस शाम 5:30 बजे है और नासिक से मुंबई के लिए देर रात तक पर्याप्त ट्रेनें उपलब्ध हैं। निर्गुड़पाड़ा की तुलना में हर्षेवाड़ी से चढ़ाई आसान है। निर्गुड़पाड़ा के उत्तर में पहाडी से एक बडा, सुरक्षित ट्रेकिंग पथ शुरू होता है। यह झाड़ियों के जंगल से होकर गुजरता है जब तक कि यह किले से जुड़े एक खुले रिज तक नहीं पहुंच जाता। जिस पहाड़ी पर किला स्थित है, उसके किनारे तक पहुँचने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। यह चढ़ाई पत्थर को काटकर बनाई गई सीढ़ी पर 60 मीटर की चढ़ाई 60 डिग्री पर पुरी करती है। सीढि़यां कई जगहों पर घिस चुकी हैं फिर भी सीढि़यों को दोनों ओर के काटे गए छेद आसानी से पकड़ने के लिए हैं। मुख्य प्रवेश द्वार पर पहुँचने के बाद, एक पथ बायीं ओर जाता है और फिर से पेचदार चट्टान को काटकर सीढ़ियाँ चढ़नी होती हैं, जो पहले की तुलना में अधिक खड़ी होती हैं। अंत में एक संकीर्ण प्रवेश द्वार के साथ सीढ़ियां समाप्त होती हैं। कई जगहों पर सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि एक बार में एक ही व्यक्ति चढ़ सकता है। हरिहर किले, के साथ-साथ स्थानीय गांवों में भी रुकने कि व्यवस्था संभव है।

विशेषताएँ !
इस किले पर कोई अच्छी संरचना नहीं बची है सिवाय एक छोटे से प्रवेश द्वार वाले भंडारण गृह के। किले के केंद्र में चट्टानों को काटकर बनाए गए पानी के कुंडों की एक श्रृंखला है। किले के सभी स्थानों का भ्रमण करने में लगभग एक घंटे का समय लगता है। 
•हरिहर फोर्ट् - हर्षगढ़ 
 •त्र्यंबक रेंज का भाग -त्र्यंबकेश्वर तहसील नासिक जिला, महाराष्ट्र


क्या हरिहर किले में किसी की मृत्यु हुई है?
2020 में, विश्व प्रसिद्ध पर्वतारोही अरुण सावंत की अहमदनगर जिले के हरिश्चंद्रगढ़ में एक नए मार्ग की खोज के दौरान मृत्यु हो गई। इसके अलावा, 2018 में, त्र्यंबकेश्वर के पास हरिहर किले में एक महिला की मौत की घटना उसके पैर फिसलने और घाटी में गिरने से हुई थी।20 मार्च 2023 !


क्या हरिहर किले पर चढ़ना सुरक्षित है?
हरिहर किले का चुनौतीपूर्ण खंड शीर्ष तक ले जाने वाली प्रतिष्ठित सीढ़ियाँ हैं। महादरवाजा से पहले और बाद की दोनों सीढ़ियाँ फिसलन भरी हो सकती हैं और मानसून के मौसम में जोखिम भरी हो सकती हैं। सीढ़ियों पर काई जमने से इस पर चढ़ना और भी मुश्किल हो जाता है। पैर रखते समय आपको बहुत सावधान रहने की जरूरत है ।


हरिहर गड़ कहा है ।
हमारे भारत के महाराष्ट्र राज्य के नासिक शहर से तक़रीबन 40 किमी दूर 3500 फीट से अधिक की ऊँचाई वाली एक पहाड़ी के ऊपर हरिहर किला स्थित है। यह किले को हर्षगढ़ किला भी कहा जाता है। महाराष्ट्र में कई बड़े बड़े और रहस्यमई किले है। जिसमे यह किला शामिल है। सभी किले से यह एक अलग है। क्योकि यह ट्रेकिंग डेस्टिनेशन बना हुआ है। यह किला अपने समय में अपना ऐतिहासिक महत्व रखता था। लेकिन आज हरिहर किला समय के चलते इतिहास में गुम हो चूका है। यह किला एक हरी भरी पहाड़ियों के बीच बना है। जिसपर से उत्साही ट्रेकर ट्रेकिंग करना पसंद करते है।

हरिहर किला घूमने का सबसे अच्छा समय !
आप अगर Best Time To harihar fort nashik की तलाश में है। तो वैसे तो पहाड़ी किला होने के कारण पुरे वर्ष में हरिहर किले में जा सकते है।लेकिन अक्टूबर से लेकर फरवरी महीने में जाना सबसे अच्छा होता है। बारिश यानि मॉनसून के समय यहाँ जाना बहुत ही अच्छा है। लेकिन उस समय फिसलन भरी सीधी चढाई बहुत खतरनाक साबित हो सकती है। जिसमे आपकी जान भी जा सकती है। अगर आप मॉनसून में हरिहर किले में घूमने जाते है। तो ज्यादा सावधानी बरतना जरुरी है।

हरिहर किला ट्रेक्किंग के लिए ।
हरिहर किला एक निरीक्षण किला के रूप में कार्य करता था। क्योकि गोंडा घाट के व्यापर मार्ग पर ध्यान रखने के लिए उसका उपयोग हुआ करता था। यह फोर्ट किओ रॉक कट सीडी अक्सर साहसिक प्रेमियों को बहुत आकर्षित करती है। वैसे आपने महल और दुर्ग देखे होंगे लेकिन यह अद्भुत इतिहास और अनूठी कलाकृति के लिए पहचाना जाता हैं। यहाँ आपको इतिहास, प्रकृति और रोमांच का सही मिश्रण देखने को मिलता है। जो सभी के दिलो को आकर्षित करता है। एक काफी खड़ी पहाड़ी पर बना हरिहर किला तक पहुंचने के लिए बनाई सीढिया सीधी रहती हैं। आपको वहा जाने के लिए यात्री को दोनों हाथों के साथ दोनों पैरों का उपयोग करना होता है। किले का ट्रेकिंग हरसवाडी और निर्गुदपाड़ा गांवों से शुरू होता है।

 हरिहर किला बनाने का उद्देश्य !
•यह महल को एक हवा महल के रूप में राजपरिवार को गर्मियों में ठंडक देने के लिए किया गया था।
•हरिहर किला पर से वातावरण की जानकारी और बरसात का अनुमान लगाया जाता था।
•यह महल को राजपरिवार को दुश्मनों के हमले से बचाने के लिए किया जाता था।
•हरिहर गड इतिहास देखे तो हरिहर किला को एक वॉच टावर के तौर पर बनाया गया था।
•वॉच टावर का मतलब की दुश्मनो के हमले या किले के आस पास की हिलचाल पर नज़र रखने के लिए बनाया गया था।

हरिहर किले कि बनावट ।
हरिहर गड बनावट देखे तो अदभुत शांत वातावरण में बना यह किले पर आपको पानी का कुंड, कई बड़े दरवाजे, एक छोटा हनुमानजी का मंदिर देखने को मिलता है। यहाँ पहुँचने में आपको एक रोमांचकारी ट्रेकर्स का अनुभव मिलता है। यह पहाड़ी तक़रीबन 90 डिग्री तक सीधी है। सीधी पहाड़ी के ऊपर चढ़ने के लिए अनुभवी ट्रेकर्स के लिए भी मुश्किल काम है। पहाड़ देखने में चौकोर और शेप प्रिज्म जैसा दिखता है। वर्टिकल पहाड़ पर चढ़ने के लिए छोटी सीढियां बनाई है। 170 मीटर की ऊंचाई पर किला बनाया गया है। एक तरफ से 75 एव दो तरफ से 90 डिग्री सीधा पर्वत है।


नाम हरिहर किला (हरिहर दुर्ग) !
•ऊंचाई- 170 मीटर
•प्रकार - पहाड़ी दुर्ग 
•चढ़ाई - बहुत कठिन
•स्थान - नासिक, महाराष्ट्र
•निकटतम गांव - टेक हर्षी
•पहाड़ी - सह्याद्कोर
•कोमत्बदि से हरिहर किला - हरिहर फोर्ट् is located in महाराष्ट्रहरिहर फोर्ट्हरिहर फोर्निट्र्दे
•निर्देसान्क् - 19°54′17.9″N 73°28′19.2″E / 19.904972°N 73.472000°E
•प्रकार - पहाड़ी किले
•ऊँचाई - 3676 Ft.
•जनप्रवेश - हाँ
•दशा - खंडहर
•स्थल इतिहास -सामग्री
पत्थर, ईंटें, क्षार
किले के ऊपर से दिखाई देता नजारा  !
अगर वातावरण में एक साफ सा नजारा है। तो किले पर से आप कई सारे स्थान देखने को मिलते है। जीके खूबसूरत नजारो के नाम हम बताते है।

बासगढ़ किला
•दक्षिण में अवध-पट्टा
•उत्तर में सातमाला
•उतावड़ पीक
•ब्रह्मा हिल्स
•वैतर्ना रेंज
•कालासुबई रेंज
•शैलबारी रेंज

हरिहर किला तक कैसे पहुंचे !
रेलवे से हरिहर किला तक कैसे पहुँचे
अगर आप हरिहर किला जाने के लिए (Train) ट्रेन यानि रेलवे मार्ग को पसंद करते है। तो आपको बतादे की वहा से नासिक रेलवे स्टेशन 56 किमी और कसारा रेलवे स्टेशन 60 किमी की दुरी पर स्थित है। वह उतर कर यात्री बहुत आसानी से बस, टैक्सी या कैब के सहायता से harihar fort nasik तक पहुँच सकते है।

सड़क मार्ग से हरिहर किला कैसे पहुँचे !
अगर आप हरिहर किला जाने के लिए (Raod) सड़क मार्ग को पसंद करते है। तो आपको बतादे की यहाँ तक जाने के लिए सड़क मार्ग से सीधा नहीं है। क्योकि पहाडिओ पर होने के कारन सड़क मार्ग से नहीं पहुँचा जा सकता है। लेकिन आप नासिक एव कसारा तक बस, टैक्सी या कैब के सहायता से पहुंच के वहा जा सकते है। और वहा से शिखर तक जाने के लिए आपको रॉक-कट कदम उठाकर पहाड़ी को ट्रेक करना पड़ता है। 

फ्लाइट से हरिहर किला कैसे पहुँचे !
अगर आप हरिहर किला जाने के लिए (Flight) फ्लाइट को पसंद करते है। तो यहाँ का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा के रूप में छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा, मुंबई है। यह हवाई अड्डा Mumbai to Harihar Fort 170 किमी दूर स्थित है। यह हवाई अड्डे से यात्रिओ को हरिहर किले के लिए सीधी टैक्सी भी मिलती है। जिसकी सहायता से आप मुंबई से नासिक और फिर वहाँ से हरिहर किले के लिए एक कैब या बस से पहुंच सकते है। नासिक शहर हरिहर किले से 40 किमी की दुरी पर स्थित है।

 अनोखी बातें ।
•यहां से बासगढ़ किला, उतावड़ पीक और ब्रह्मा हिल्स का खूबसूरत नजारा दिखता है।
•किला दो तरफ से 90 डिग्री सीधा एव तीसरी तरफ 75 की डिग्री पर है। और 170 मीटर की ऊंचाई पर बना है।
•किले की चढ़ाई को हिमालय के पर्वतारोहियों द्वारा दुनिया का सबसे खतरनाक ट्रैक कहा गया है।
•मॉनसून में यहाँ पर जाओ तो ज्यादा सावधानी बरतने की जरुरत रहेगी।
•हरिहर फोर्ट नासिक जिले में ट्रेकर्स के लिए सबसे प्रिय स्थानों में से एक है।
•हरिहर किला पश्चिमी घाट के त्र्यंबकेश्वर पर्वत में स्थित है।
•भोजन और ठहरने की व्यवस्था के लिए हर्षवाड़ी अभी भी विकसित नहीं है।

संदर्भ !
• "Nasik District Gazetteers". •Cultural.maharashtra.gov.in. 1965-03-31. अभिगमन तिथि 2022-08-11.
• "Harihar Fort". Fort Trek (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-11-17.
 •"Harihar Fort". Fort Trek (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-11-14.
"Harihar, •Sahyadri,Shivaji,Trekking,Marathi,Maharastra".
• मूल से 26 February 2019 को पुरालेखित. अभिगमन •तिथि 28 December 2016.
•साँचा:Forts in    
•चारों ओर की पहाड़ियाँ
•खतरनाक आरोहण
•किले का मुख्य द्वार से नजारा
•दुसरा प्रवेश द्वार
•महाराष्ट्र के दुर्गों की सूची
•भारत में किलों की सूची
•मराठी लोग
•भारत का सैन्य इतिहास
•मराठा साम्राज्य में शामिल लोगों की सूची





 Note यह ब्लॉग हरिहर किले के बारे में बताने के लिए तथा उसमें कैसे यात्रा करें तथा वहां तक कैसे पहुंचे उसका इतिहास बताने के लिए बनाया गया है, इसमें कोई भी गलत जानकारी दी गई हो तो हमें आप हमारे संपर्क फॉर्म में संपर्क करके बताएं हम उसे सही करने का प्रयास करेंगे ।

Edited By ; Ashu Gyani (Ashu Patel )



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